जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है, वह वास्तव में भगवान ही है,_इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जाए।31* जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकता का अनुभव कर चुके है, उनकी दृष्टि में भगवान का स्वरूप समस्त विकल्पों_ भेदों से रहित हैं; फिर भी वे अपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण, आयुध और रूप नामक शक्तियों को धारण करते हैं, यह बात निश्चित रूप से सत्य है। इस कारण सर्वज्ञ सर्वव्यापक भगवान श्री हरि सदा सर्वत्र सब स्वरूपो से हमारी रक्षा करें ।32,33* जो अपने भयंकर अट्टहास से सब लोगों के भय को भगा देते हैं और अपने तेज से सबका तेज ग्रस लेते हैं वे भगवान नृसिंह दिशा_ विदिशा में नीचे_ ऊपर बाहर _भीतर___ सब ओर हमारी रक्षा करें।34*