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Showing posts from April, 2024

अश्वनी

तपस्या, वरदान विवाह विहार कपिल जन्म भक्तियोग की महिमा तत्वों की उत्पति का वर्णन प्रकृति पुरुष के विवेक से मोक्ष की प्राप्ति अ स्टांग योग विधि काल की महिमा अधोगति मनुष्य योनि धूम मार्ग, अर्ची मार्ग मोक्ष पद

अनुराधा 17

   चंद्र वंश का वर्णन। सहसों श्री वाले विराट पुरुष नारायण के नाभि सरोवर के कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई ब्रह्मा जी के पुत्र हुए अत्री वे अपने गुणों के कारण ब्रह्मा जी के समान ही थे। 19 तरीके नेत्रों से अमृत में चंद्रमा का जन्म हुआ ब्रह्मा जी ने चंद्रमा को ब्राह्मण और स्त्री और नक्षत्रों का अधिपति बना दिया उन्होंने तीनों लोगों पर विजय प्राप्त की और राजसूय यज्ञ किया इससे उनका घमंड बढ़ गया और उन्होंने बलपूर्वक बृहस्पति की पत्नी तारा को हर लिया Dev Guru brihaspati ne apni patni Ko lauta dene ke liye unse bar bar yachna ki parantu vah itne matwale ho gaye the ki unhone kisi prakar unki patni Ko nahin Laut aaya aisi paristhiti mein uske liye Devta aur danav mein got Sangram chid Gaya शुक्राचार्य जी ने बृहस्पति जी के देश से अक्षरों के साथ चंद्रमा का पक्ष ले लिया और महादेव जी ने स्नेह व समस्त बूथ गणों के साथ अपने विद्या गुरु अंगिरा जी के पुत्र राष्ट्रपति का पक्ष दिया देवराज इंद्र ने भी समस्त देवताओं के साथ अपने गुरु बृहस्पति जी का ही पक्ष लिया इस प्रकार तारा के निमित्...

पुनर्वसु 7

*वासान्शी जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृहणाति नारोपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि  देही।।22।। शत शत नमन  *जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता हैं, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता हैं।* श्री कृष्ण, गीता अध्याय 2,श्लोक22.

पुष्य 8

 श्री महादेव जी बोले तुम लोग राजा प्राचीन बड़ी के पुत्र ह तुम्हारा कल्याण हो तुम जो कुछ करना चाहते हो वह भी मुझे मालूम है इस समय तुम लोगों पर कृपा करने के लिए ही मैंने तुम्हें किस प्रकार दर्शन दिया है जो व्यक्ति अवैध प्रकृति तथा जीव संगीत पुरुष इन दोनों के नियामक भगवान वासुदेव की साक्षात शरण लेता है वह मुझे परम प्रिय है अपने वर्णाश्रम धर्म का भली-भांति पालन करने वाला पुरुष सो जन्म के बाद ब्रह्मा के पद को प्राप्त होता है और इससे भी अधिक होने पर वह मुझे प्राप्त होता है परंतु जो भगवान का भक्त है वह तो मृत्यु के बाद ही सीधे भगवान विष्णु के उस सर्व प्रपंच आती परम पद को प्राप्त हो जाता है रूद्र रूप में स्थित में तथा अन्य अधिकारी देवता अपने अपने अधिकार की समाप्ति के बाद प्राप्त करेंगे तुम लोग भगवत भक्त होने के नाते मुझे भगवान के समान ही प्यारे हो इसी प्रकार भगवान के भक्तों को भी मुझसे बढ़कर और कोई कभी प्रिय नहीं होता अब मैं तुम्हें एक बड़ा ही पवित्र मंगलमय और कल्याणकारी स्तोत्र सुनाता हूं इसका तुम लोग शुद्ध भाव से जब करना। श्री मैत्री जी कहते हैं जब नारायण परायण करो ना हार गए भगवान शिव ने...

आश्लेषा 9

 1. श्रीमन नारायण नारायण नारायण  2.श्री राम जय राम जय जय राम  3.ग्वालन संग मिट्टी खाई 4. कान्हियो प्यारो कान्हियों प्यारो साखिजीवन प्राण हमारो 5. इकली घेरी बन में आई 6. आरती कुंज बिहारी की 7

मघा 10

 1वेद स्तुति 2.नारायण कवच 3. रुद्रगीत  4.अंतिम उपदेश  5. कलयुगी स्तुति 6. बारहवां स्कन्द  7. अंतिम उपदेश  8.सांख्य योग  9.गजेंद्र स्तुति  9.नरसिंह स्तुति

पूर्वा फाल्गुनी 11

 *श्रीमद् भागवत की संक्षिप्त विषय सूची* सूतजी कहते हैं_ भग वदभक्ति रूप महान धर्म को नमस्कार हैं। विश्व विधाता भगवान श्री कृष्ण को नमस्कार है।अब मैं ब्राह्मणों को नमस्कार करके श्रीमद भागवत उक्त सनातन धर्मों का संक्षिप्त विवरण सुनाता हूं।1

उत्तरा फाल्गुनी 12

 जो व्यक्ति इस कवच का 108 बार पाठ कर लेगा उसकी सब बीमारी नस्ट हो जाएगी। इसके नित्य प्रति 11 बार जप करने से वह अभय हो जाएगा। इसका जप करने से पहले एवम् बाद में *ओम नमो भगवते वासुदेवाय* मंत्र की दो माला करना अवश्य हैं.। दीपक जलाकर,अगरबत्ती लगाकर एकाग्र चित्त से श्रद्धा पूर्वक पाठ करे।

महामारी रक्षा_ महाकवच

जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है, वह वास्तव में भगवान ही है,_इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जाए।31* जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकता का अनुभव कर चुके है, उनकी दृष्टि में भगवान का स्वरूप समस्त विकल्पों_ भेदों से रहित हैं; फिर भी वे अपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण, आयुध और रूप नामक शक्तियों को धारण करते हैं, यह बात निश्चित रूप से सत्य है। इस कारण सर्वज्ञ सर्वव्यापक भगवान श्री हरि सदा सर्वत्र सब स्वरूपो से हमारी रक्षा करें ।32,33* जो अपने भयंकर अट्टहास से सब लोगों के भय को भगा देते हैं और अपने तेज से सबका तेज ग्रस लेते हैं वे भगवान नृसिंह दिशा_ विदिशा में नीचे_ ऊपर बाहर _भीतर___ सब ओर हमारी रक्षा करें।34*

राम

देवताओं की प्रार्थना से साक्षात परब्रह्म परमात्मा भगवान श्री हरि ही अपने अंशांश से चार रूप धारण करके राजा दशरथ के पुत्रहुऐ। उनके नाम थे-- राम, लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न। भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के सत्य की रक्षा के लिए राजपाट छोड़ दिया और वे वन वन में फिरते रहे। उनके चरण कमल इतने सुकुमार थे कि परम सुकुमारी श्रीजानकीजीके करकमलों का स्पर्श भी उनसे सहन नहीं होता था।वही चरण जब वन में चलते चलते थक जाते तब हनुमान और लक्ष्मण उन्हें दबादबाकर उनकी थकावट मिटाते।सूर्पनखाको नाक कान काट कर विरूप कर देने के कारण उन्हें अपनी प्रियतमा श्री जानकी जी का वियोग भी सहना पड़ा।इस प्रकार वियोग के कारण क्रोधवशउनकी भौंहे तन गई, जिन्हें देखकर समुद्र तक भयभीत हो गया।इसके बाद उन्होंने समुद्र पर पुल बांधा और लंका में जाकर दुष्ट राक्षसों के जंगल को दावाग्निके समान दग्ध कर दिया वह कौशल नरेश हमारी रक्षा करें।

भगीरथ

गंगा जी ने कहा-- जिस समय में स्वर्ग से पृथ्वी तल पर हूं उस समय मेरे वेग को कोई धारण करने वाला होना चाहिए भगीरथ ऐसा ना होने पर मैं पृथ्वी को छोड़कर रसातल में चली जाऊंगी। इसके अतिरिक्त इस कारण से भी मैं पृथ्वी पर नहीं जाऊंगी कि लोग मुझ में अपने पाप धो लेंगे फिर मैं उस बाप को कहां दूंगी भगीरथ इस विषय में तुम स्वयं विचार कर लो। भगीरथ ने कहा-- माता!जिन्होंने लोक परलोक धन-संपत्ति और स्त्री पुत्र की कामना का सन्यास कर दिया है जो संसार से उपरत्न होकर अपने आप में शांत है जो ब्राह्मण इष्ट और लोगों को पवित्र करने वाले परोपकारी सज्जन है वे अपने अंग स्पर्श से हमारे पापों को नष्ट कर देंगे क्योंकि उनके हृदय में अग्रसर को मारने वाले भगवान सर्वदा निवास करते हैं। समस्त प्राणियों की आत्मा रुद्रदेव तुम्हारा वेट धारण कर लेंगे क्योंकि जैसे साड़ी सूत्रों में उतरे थे वैसे ही यह सारा विश्व भगवान रुद्र में हीओत प्रोत है।

जेष्ठा 18.

2.भगवान का गर्भ ग्रह प्रवेश और देवताओं द्वारा गर्भ स्तुति 3. भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य। 4. कंस के हाथ से छूटकर जोगमाया का आकाश में जाकर भविष्यवाणी करना। 5. गोकुल में भगवान का जन्म महोत्सव। 6. पूतना उद्धार। 7. संकट भंजन और तृणावर्त उद्धार। 8. नामकरण संस्कार और बाल लीला. 9. श्री कृष्ण का उखल से बांधा जाना। 10. यमलार्जुन का उद्धार। 11. गोकुल से वृंदावन जाना तथा व ससुर और बकासुर का उद्धार. 12. अघासुर का उद्धार. 13. ब्रह्मा जी का मोहऔर उसका नाश. 14. ब्रह्मा जी के द्वारा भगवान की स्तुति. 15.धेनुकासुर का उद्धार और ग्वाल बालों को कालिया नाग के विषयसे बचाना.

Ombhagwat