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राम

देवताओं की प्रार्थना से साक्षात परब्रह्म परमात्मा भगवान श्री हरि ही अपने अंशांश से चार रूप धारण करके राजा दशरथ के पुत्रहुऐ। उनके नाम थे-- राम, लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न।भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के सत्य की रक्षा के लिए राजपाट छोड़ दिया और वे वन वन में फिरते रहे। उनके चरण कमल इतने सुकुमार थे कि परम सुकुमारी श्रीजानकीजीके करकमलों का स्पर्श भी उनसे सहन नहीं होता था।वही चरण जब वन में चलते चलते थक जाते तब हनुमान और लक्ष्मण उन्हें दबादबाकर उनकी थकावट मिटाते।सूर्पनखाको नाक कान काट कर विरूप कर देने के कारण उन्हें अपनी प्रियतमा श्री जानकी जी का वियोग भी सहना पड़ा।इस प्रकार
वियोग के कारण क्रोधवशउनकी भौंहे तन गई, जिन्हें देखकर समुद्र तक भयभीत हो गया।इसके बाद उन्होंने समुद्र पर पुल बांधा और लंका में जाकर दुष्ट राक्षसों के जंगल को दावाग्निके समान दग्ध कर दिया वह कौशल नरेश हमारी रक्षा करें।

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