गंगा जी ने कहा--
जिस समय में स्वर्ग से पृथ्वी तल पर हूं उस समय मेरे वेग को कोई धारण करने वाला होना चाहिए भगीरथ ऐसा ना होने पर मैं पृथ्वी को छोड़कर रसातल में चली जाऊंगी।
इसके अतिरिक्त इस कारण से भी मैं पृथ्वी पर नहीं जाऊंगी कि लोग मुझ में अपने पाप धो लेंगे फिर मैं उस बाप को कहां दूंगी भगीरथ इस विषय में तुम स्वयं विचार कर लो।
भगीरथ ने कहा--
माता!जिन्होंने लोक परलोक धन-संपत्ति और स्त्री पुत्र की कामना का सन्यास कर दिया है जो संसार से उपरत्न होकर अपने आप में शांत है जो ब्राह्मण इष्ट और लोगों को पवित्र करने वाले परोपकारी सज्जन है वे अपने अंग स्पर्श से हमारे पापों को नष्ट कर देंगे क्योंकि उनके हृदय में अग्रसर को मारने वाले भगवान सर्वदा निवास करते हैं।
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