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महामारी रक्षा_ महाकवच

जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है, वह वास्तव में भगवान ही है,_इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जाए।31* जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकता का अनुभव कर चुके है, उनकी दृष्टि में भगवान का स्वरूप समस्त विकल्पों_ भेदों से रहित हैं; फिर भी वे अपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण, आयुध और रूप नामक शक्तियों को धारण करते हैं, यह बात निश्चित रूप से सत्य है। इस कारण सर्वज्ञ सर्वव्यापक भगवान श्री हरि सदा सर्वत्र सब स्वरूपो से हमारी रक्षा करें ।32,33* जो अपने भयंकर अट्टहास से सब लोगों के भय को भगा देते हैं और अपने तेज से सबका तेज ग्रस लेते हैं वे भगवान नृसिंह दिशा_ विदिशा में नीचे_ ऊपर बाहर _भीतर___ सब ओर हमारी रक्षा करें।34*

राम

देवताओं की प्रार्थना से साक्षात परब्रह्म परमात्मा भगवान श्री हरि ही अपने अंशांश से चार रूप धारण करके राजा दशरथ के पुत्रहुऐ। उनके नाम थे-- राम, लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न। भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के सत्य की रक्षा के लिए राजपाट छोड़ दिया और वे वन वन में फिरते रहे। उनके चरण कमल इतने सुकुमार थे कि परम सुकुमारी श्रीजानकीजीके करकमलों का स्पर्श भी उनसे सहन नहीं होता था।वही चरण जब वन में चलते चलते थक जाते तब हनुमान और लक्ष्मण उन्हें दबादबाकर उनकी थकावट मिटाते।सूर्पनखाको नाक कान काट कर विरूप कर देने के कारण उन्हें अपनी प्रियतमा श्री जानकी जी का वियोग भी सहना पड़ा।इस प्रकार वियोग के कारण क्रोधवशउनकी भौंहे तन गई, जिन्हें देखकर समुद्र तक भयभीत हो गया।इसके बाद उन्होंने समुद्र पर पुल बांधा और लंका में जाकर दुष्ट राक्षसों के जंगल को दावाग्निके समान दग्ध कर दिया वह कौशल नरेश हमारी रक्षा करें।

भगीरथ

गंगा जी ने कहा-- जिस समय में स्वर्ग से पृथ्वी तल पर हूं उस समय मेरे वेग को कोई धारण करने वाला होना चाहिए भगीरथ ऐसा ना होने पर मैं पृथ्वी को छोड़कर रसातल में चली जाऊंगी। इसके अतिरिक्त इस कारण से भी मैं पृथ्वी पर नहीं जाऊंगी कि लोग मुझ में अपने पाप धो लेंगे फिर मैं उस बाप को कहां दूंगी भगीरथ इस विषय में तुम स्वयं विचार कर लो। भगीरथ ने कहा-- माता!जिन्होंने लोक परलोक धन-संपत्ति और स्त्री पुत्र की कामना का सन्यास कर दिया है जो संसार से उपरत्न होकर अपने आप में शांत है जो ब्राह्मण इष्ट और लोगों को पवित्र करने वाले परोपकारी सज्जन है वे अपने अंग स्पर्श से हमारे पापों को नष्ट कर देंगे क्योंकि उनके हृदय में अग्रसर को मारने वाले भगवान सर्वदा निवास करते हैं। समस्त प्राणियों की आत्मा रुद्रदेव तुम्हारा वेट धारण कर लेंगे क्योंकि जैसे साड़ी सूत्रों में उतरे थे वैसे ही यह सारा विश्व भगवान रुद्र में हीओत प्रोत है।

जेष्ठा 18.

2.भगवान का गर्भ ग्रह प्रवेश और देवताओं द्वारा गर्भ स्तुति 3. भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य। 4. कंस के हाथ से छूटकर जोगमाया का आकाश में जाकर भविष्यवाणी करना। 5. गोकुल में भगवान का जन्म महोत्सव। 6. पूतना उद्धार। 7. संकट भंजन और तृणावर्त उद्धार। 8. नामकरण संस्कार और बाल लीला. 9. श्री कृष्ण का उखल से बांधा जाना। 10. यमलार्जुन का उद्धार। 11. गोकुल से वृंदावन जाना तथा व ससुर और बकासुर का उद्धार. 12. अघासुर का उद्धार. 13. ब्रह्मा जी का मोहऔर उसका नाश. 14. ब्रह्मा जी के द्वारा भगवान की स्तुति. 15.धेनुकासुर का उद्धार और ग्वाल बालों को कालिया नाग के विषयसे बचाना.

Ombhagwat

मूल 19

16.कालिया पर कृपा 17. कालिया के काली देह में आने की कथा तथा भगवान का ब्रज वासियों को दावानल से बचाना।18. प्रलंबासुर का उद्धार। 19. गौओं और गोपों को दावा नल से बचाना 20. वर्षा और शरद ऋतु का वर्णन 21. वेणु गीत 22. चीरहरण 23. यज्ञ पत्नियों पर कृपा 24 इंद्र यज्ञ निवारण 25. गोवर्धन धारण 26. नंद बाबा से गोपों की श्री कृष्ण के प्रभाव के विषय में बातचीत 27. श्री कृष्ण का अभिषेक 28. वरुण लोक से नंद जी को छुड़ाकर लाना 29. रासलीला का आरंभ 30. श्री कृष्ण के विरह में गोपियों की दशा 31. गोपी का गीत 32. भगवान का प्रकट होकर गोपियों को सांत्वना देना.