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अश्वनी

तपस्या, वरदान विवाह विहार कपिल जन्म भक्तियोग की महिमा तत्वों की उत्पति का वर्णन प्रकृति पुरुष के विवेक से मोक्ष की प्राप्ति अ स्टांग योग विधि काल की महिमा अधोगति मनुष्य योनि धूम मार्ग, अर्ची मार्ग मोक्ष पद

अनुराधा 17

   चंद्र वंश का वर्णन। सहसों श्री वाले विराट पुरुष नारायण के नाभि सरोवर के कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई ब्रह्मा जी के पुत्र हुए अत्री वे अपने गुणों के कारण ब्रह्मा जी के समान ही थे। 19 तरीके नेत्रों से अमृत में चंद्रमा का जन्म हुआ ब्रह्मा जी ने चंद्रमा को ब्राह्मण और स्त्री और नक्षत्रों का अधिपति बना दिया उन्होंने तीनों लोगों पर विजय प्राप्त की और राजसूय यज्ञ किया इससे उनका घमंड बढ़ गया और उन्होंने बलपूर्वक बृहस्पति की पत्नी तारा को हर लिया Dev Guru brihaspati ne apni patni Ko lauta dene ke liye unse bar bar yachna ki parantu vah itne matwale ho gaye the ki unhone kisi prakar unki patni Ko nahin Laut aaya aisi paristhiti mein uske liye Devta aur danav mein got Sangram chid Gaya शुक्राचार्य जी ने बृहस्पति जी के देश से अक्षरों के साथ चंद्रमा का पक्ष ले लिया और महादेव जी ने स्नेह व समस्त बूथ गणों के साथ अपने विद्या गुरु अंगिरा जी के पुत्र राष्ट्रपति का पक्ष दिया देवराज इंद्र ने भी समस्त देवताओं के साथ अपने गुरु बृहस्पति जी का ही पक्ष लिया इस प्रकार तारा के निमित्...

पुनर्वसु 7

*वासान्शी जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृहणाति नारोपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि  देही।।22।। शत शत नमन  *जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता हैं, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता हैं।* श्री कृष्ण, गीता अध्याय 2,श्लोक22.

पुष्य 8

 श्री महादेव जी बोले तुम लोग राजा प्राचीन बड़ी के पुत्र ह तुम्हारा कल्याण हो तुम जो कुछ करना चाहते हो वह भी मुझे मालूम है इस समय तुम लोगों पर कृपा करने के लिए ही मैंने तुम्हें किस प्रकार दर्शन दिया है जो व्यक्ति अवैध प्रकृति तथा जीव संगीत पुरुष इन दोनों के नियामक भगवान वासुदेव की साक्षात शरण लेता है वह मुझे परम प्रिय है अपने वर्णाश्रम धर्म का भली-भांति पालन करने वाला पुरुष सो जन्म के बाद ब्रह्मा के पद को प्राप्त होता है और इससे भी अधिक होने पर वह मुझे प्राप्त होता है परंतु जो भगवान का भक्त है वह तो मृत्यु के बाद ही सीधे भगवान विष्णु के उस सर्व प्रपंच आती परम पद को प्राप्त हो जाता है रूद्र रूप में स्थित में तथा अन्य अधिकारी देवता अपने अपने अधिकार की समाप्ति के बाद प्राप्त करेंगे तुम लोग भगवत भक्त होने के नाते मुझे भगवान के समान ही प्यारे हो इसी प्रकार भगवान के भक्तों को भी मुझसे बढ़कर और कोई कभी प्रिय नहीं होता अब मैं तुम्हें एक बड़ा ही पवित्र मंगलमय और कल्याणकारी स्तोत्र सुनाता हूं इसका तुम लोग शुद्ध भाव से जब करना। श्री मैत्री जी कहते हैं जब नारायण परायण करो ना हार गए भगवान शिव ने...